श्री मान अरविन्द केजरीवाल जी
मुख्यमन्त्री, दिल्ली सरकार
विषय : आपको फ़ज़ीयत करवाना अच्छा तो नहीं लगता
मैं भी दिल्ली का एक नागरिक हूँ। और दिल्ली में रोज़ हो रही राजनितिक उठा पठक से परेशान होकर आपको ये पत्र लिख रहा हूँ। जितना मैं अब तक समझ पाया हूँ वो सिर्फ और सिर्फ इतना है कि आपको या तो विवाद बनाने में मज़ा आता है या फिर अपनी फ़ज़ीयत करवाने में। पर इन सब के चक्कर में अगर कोई पिस रहा है तो वो दिल्ली है।
अब आप अपने कानून मंत्री का ही मामला ले लो। आपका कानून मंत्री पिछले 3 महीने में 300 बार अपने बयान बदल चूका था। पूरी दिल्ली को पता चल गया था की वो आदमी फ़र्ज़ी है। खुद 2 महीने पहले विश्वविद्यालय ने न्यायालय में अपना जवाब देकर ये साफ़ कर दिया था की डिग्री फ़र्ज़ी है। आपने इस चक्कर में सौ झूठ बोले और पता नहीं कितने सम्मानित लोगों पर आरोप लगाये। पर जब न्यायालय का डंडा चला तो दूध का दूध और पानी का पानी हो गया।
ऐसा ही कुछ नगर निगम के मसले पर भी हुआ है। तीनों नगर निगमों का पैसा दिल्ली सरकार को ही देना था और आपने दिया भी। पर उससे पहले आपने सौ झूठ बोले ,कभी देश के प्रधानमंत्री, तो कभी उपराज्यपाल, तो कभी नगर निगमों को गाली दी। आखिरकार न्यायालय के डंडे के बाद आपको मज़बूरन ये पैसा देना ही पडा। क्यूंकि तब आपके पास कोई चारा नहीं बचा था। पर एक बड़ा सवाल ये है इन सबसे दिल्ली और दिल्ली वालों को क्या मिला? हमें अगर मिला तो कूड़े के ढेर और बदनामी।
मेरी आप से हाथ जोड़ कर ये विनती है की अब देश आगे जाने को तैयार है, पूरी दुनिया भारत को एक नयी नज़र से देखने लगी है। ऐसे में देश की राजधानी में रोज़ का बवाल किसी भी तरीके से ठीक नहीं कहा जा सकता। इससे ना सिर्फ आपकी अपितु हमारी भी फ़ज़ीयत हो रही है। ट्रैन या हवाई सफर के दौरान दूसरे राज्य के लोग ताना देकर हमसे पूछते हैं की भाई ये क्या चुन लिया आपने दिल्ली में। इसलिए आप कृपया काम में ध्यान दे वरना आपकी इन हरकतों से दिल्ली बहुत पीछे निकल जायेगी।
आपका शुभचिंतक
गौरव जोशी , एक आम आदमी

मैंने आपके इस पत्र बहुत अच्छे तरीके से पढ़ा है आपने बहुत बढ़िया तरीके से आम आदमी के तकलीफ को आम आदमी के नेता जो की अब ख़ास हो गए हैं उन तक अपने शब्दों में पहुँचाया है. भाई, यदि इतने पर भी ये न संभला तो आप समझ लीजिये ये निकृष्ट व्यक्ति है. दिल्ली वालों ने गत चुनाव में इसे दिल खोल कर मत का दान दिया था बदले में ये झाड़ू निकाल कर दिल्ली के लोगों को घर में झाड़ू मार रहा है अभी तक के इसके कार्यकलाप ऐसे ही हालात दिखा रहे हैं...भविष्य का मुझे पता नहीं.
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